आईएएनएस, हैदराबाद। तेलंगाना की कांग्रेस सरकार और केंद्र की मोदी सरकार के बीच फंड आवंटन और वितरण को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार और तेलंगाना राज्य सरकार के बीच अब राजनीतिक वाद-विवाद शुरू हो गया है। इस बीच कांग्रेस ने आरोप लगाए कि केंद्र सरकार राज्य के लिए पर्याप्त फंड नहीं जारी कर रही है।

दरअसल, तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने हाल के दिनों में आरोप लगाया था कि केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी राज्य की परियोजनाओं को रोक रहे हैं। सीएम रेड्डी ने यह आरोप 26 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद लगाया। इस मुलाकात के दौरान सीएम रेवंत रेड्डी ने राज्य में आगामी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए केंद्र की मंजूरी मांगी थी।

केंद्रीय मंत्री ने दी आरोप साबित करने की चुनौती

जानकारी दें कि इस पूरे मामले में केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने सीएम रेवंत रेड्डी को अपने आरोप साबित करने की चुनौती दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री ने हैदराबाद मेट्रो के दूसरे चरण के लिए केंद्र की मंजूरी को अवरुद्ध कर दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि किशन रेड्डी नहीं चाहते थे कि उन्हें इस परियोजना का श्रेय मिले।

केंद्रीय मंत्री ने किया आरोपों से इनकार

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उधर, केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी सभी प्रकार के आरोपों से किनारा किया। उल्टा उन्होंने राज्य की कांग्रेस सरकार पर विभिन्न योजनाओं को लागू करने में केंद्र के साथ सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही बीजेपी नेता ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए वादों को पूरा करने में अपनी सरकार की विफलताओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए उनके खिलाफ निराधार आरोप लगा रहे हैं।

बीजेपी पर लोगों ने जताया भरोसा: किशन रेड्डी

तेलंगाना बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष किशन रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि केंद्र विधानसभा चुनावों में उसके द्वारा की गई छह गारंटी और 420 वादों को लागू करे। उन्होंने यह भी कहा कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की तीन एमएलसी सीटों में से दो पर भाजपा की जीत मुख्यमंत्री के निराधार आरोपों के खिलाफ जनता का फैसला है।

राज्य मंत्रिमंडल की हुई बैठक

केंद्र सरकार और राज्य सरकार के बीच चल रहे टकराव के बीच राज्य मंत्रिमंडल ने लंबित परियोजनाओं और केंद्र से मिलने वाले धन पर चर्चा करने तथा केंद्र के समक्ष इन मुद्दों को उठाने और संसद में उठाने की रणनीति तैयार करने के लिए राज्य के सभी सांसदों की बैठक बुलाई।

इस बैठक के लिए राज्य के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने व्यक्तिगत रूप से किशन रेड्डी और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री सहित सभी दलों के सांसदों को बैठक में आमंत्रित किया। हालांकि, इस बैठक से बीजेपी और बीआरएस दोनों ने ही दूरी बनाई। इस बैठक में कांग्रेस सांसदों के अलावा केवल एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ही बैठक में शामिल हुए। किसी अन्य पार्टी के सांसद नहीं आए।

बैठक में किस बात पर हुई चर्चा?

बता दें कि इस बैठक में राज्य के मुद्दों पर संसद में स्थगन प्रस्ताव लाने के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि बीआरएस ने पिछले 10 वर्षों से लापरवाही बरती है, और हालांकि वे पिछले एक साल से सभी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सहयोग नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य केंद्र द्वारा आवश्यक निधि और परियोजनाओं की मंजूरी की कमी से जूझ रहा है।

विक्रमार्क की मानें तो स्टील प्लांट, रेलवे कोच फैक्ट्री की स्थापना और आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 के तहत किए गए अन्य वादों सहित कई मुद्दे अभी भी केंद्र के पास लंबित हैं। जनवरी में ही उन्होंने केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी को तेलंगाना में कई परियोजनाओं के लिए केंद्र के समर्थन का अनुरोध करने के लिए लिखा, जो राज्य की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन परियोजनाओं के लिए कुल अनुरोध 1,63,559.31 करोड़ रुपये था।

बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

दिलचस्प है कि जिस दौरान राज्य मंत्रिमंडल की बैठक चल रही थी, ठीक उसी समय केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आरोप लगाया कि रेवंत रेड्डी सरकार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस द्वारा किए गए वादों को लागू करने का बिल चुकाना चाहती है।